मधुमक्खियों के हमले के बीच 20 बच्चों की जान बचाकर अमर हो गईं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कंचन बाई मेघवाल
भूमिका मध्य प्रदेश के नीमच ज़िले से सामने आई यह घटना न केवल दिल को झकझोर देने वाली है, बल्कि मानवता, कर्तव्य और साहस की एक ऐसी मिसाल भी है, जिसे आने वाली पीढ़ियाँ लंबे समय तक याद रखेंगी। रानपुर गांव की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कंचन बाई मेघवाल ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना 20 मासूम बच्चों की जान बचाकर यह साबित कर दिया कि सच्ची बहादुरी पद या ताकत से नहीं, बल्कि संवेदना और जिम्मेदारी से जन्म लेती है। क्या है पूरा मामला यह दुखद घटना उस समय हुई जब रानपुर गांव के आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चे रोज़ की तरह खेल रहे थे। अचानक वहां मधुमक्खियों के झुंड ने हमला कर दिया। बच्चों में अफरा-तफरी मच गई और स्थिति बेहद भयावह हो गई। इसी दौरान 45 वर्षीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कंचन बाई मेघवाल ने बिना एक पल गंवाए बच्चों को बचाने का निर्णय लिया। उन्होंने एक-एक कर 20 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला, लेकिन इस दौरान वे खुद मधुमक्खियों के गंभीर डंक का शिकार हो गईं। बच्चों को जीवनदान, खुद को बलिदान कंचन बाई ने अंतिम क्षण तक बच्चों को बचाने को ही अपनी प्राथमिकता बनाया। बच्चों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के बाद उनकी...