राजस्थान पंचायत चुनाव 2026: पंच, सरपंच, पंचायत समिति और जिला परिषद चुनाव की पूरी जानकारी, इतिहास, मतदान की तारीखें और परिणाम
राजस्थान के पंचायती राज चुनाव 2026 की चरणवार समय-सारणी, सरपंच पद का इतिहास, चुनाव प्रक्रिया, आरक्षण, ग्रामीण लोकतंत्र, पंचायत समिति, जिला परिषद, प्रधान, जिला प्रमुख और आधिकारिक चुनाव परिणामों की विस्तृत जानकारी।
1. राजस्थान पंचायत चुनाव 2026: एक नजर में पूरी जानकारी
राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनाव 2026 चार चरणों में संपन्न हो रहे हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने 3 अक्टूबर 2026 को कार्यक्रम की घोषणा की थी, जिसके बाद 6 अक्टूबर 2026 को धनतेरस के कारण पहले तीन चरणों की तिथियों में संशोधन किया गया। इस चुनाव में 41 जिला परिषदों, 457 पंचायत समितियों और 14,403 ग्राम पंचायतों के लिए जनप्रतिनिधि चुने जा रहे हैं। कुल मतदाताओं की संख्या 4 करोड़ 3 लाख से अधिक है।
जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों का चुनाव ईवीएम से हो रहा है, जबकि सरपंच और वार्ड पंच का चुनाव मतपत्रों से हो रहा है। पंच-सरपंच के परिणाम मतदान के तुरंत बाद घोषित किए जा रहे हैं, जबकि जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों की मतगणना 20 नवंबर 2026 को होगी।
2. पंचायत चुनावों का महत्व
पंचायती राज भारत के ग्रामीण लोकतंत्र की रीढ़ है। 73वें संविधान संशोधन के बाद पंचायतों को संवैधानिक दर्जा मिला और उन्हें स्वशासन की इकाइयों के रूप में मान्यता दी गई। पंचायत चुनाव वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से गांव के लोग अपने प्रतिनिधि चुनते हैं, जो स्थानीय विकास, सामाजिक न्याय और शासन में जनभागीदारी सुनिश्चित करते हैं।
राजस्थान में पंचायती राज की शुरुआत 2 अक्टूबर 1959 को नागौर जिले से हुई थी, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इसकी नींव रखी। तब से लेकर आज तक पंचायती राज व्यवस्था में कई बदलाव हुए हैं, लेकिन ग्रामीण शासन में इसकी भूमिका लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है।
3. सरपंच की भूमिका
सरपंच ग्राम पंचायत का निर्वाचित प्रमुख होता है। वह ग्राम सभा की बैठकों की अध्यक्षता करता है, ग्राम पंचायत की वार्षिक योजनाओं और बजट को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और केंद्र तथा राज्य सरकार की योजनाओं को गांव स्तर पर पहुंचाने का काम करता है। सरपंच का पद ग्रामीण लोकतंत्र में सबसे निचले स्तर पर सीधे जनता द्वारा चुना गया एक महत्वपूर्ण पद है।
सरपंच के अधिकारों, कार्यों और जिम्मेदारियों की विस्तृत जानकारी के लिए संबंधित लेख देखें।
4. सरपंच पद का इतिहास
सरपंच पद का इतिहास कई ऐतिहासिक चरणों में विभाजित है। प्राचीन भारत में ग्राम प्रशासन की व्यवस्था थी, जिसमें ग्राम प्रमुख स्थानीय मामलों का संचालन करते थे। मध्यकालीन भारत में भी स्थानीय प्रशासन की व्यवस्थाएं मौजूद थीं, लेकिन उनका स्वरूप क्षेत्रीय रूप से भिन्न था। ब्रिटिश शासन के दौरान स्थानीय निकायों का विकास हुआ और स्वतंत्रता के बाद ग्रामीण स्वशासन को संवैधानिक और कानूनी आधार मिला।
1957 में गठित बलवंत राय मेहता समिति की सिफारिशों के आधार पर 2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के नागौर जिले से देश में पंचायती राज की विधिवत शुरुआत हुई। 1992 के 73वें संविधान संशोधन ने पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया, जो 24 अप्रैल 1993 से प्रभावी हुआ। इसके बाद राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 पारित किया गया, जिसने वर्तमान सरपंच पद का कानूनी स्वरूप निर्धारित किया।
5. स्वतंत्रता के बाद पंचायती राज का विकास
स्वतंत्रता के बाद ग्रामीण भारत के पुनर्निर्माण के लिए सामुदायिक विकास योजना शुरू की गई। बलवंत राय मेहता समिति (1957) ने लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और पंचायती राज व्यवस्था की सिफारिश की। इसके बाद 1959 में राजस्थान में पंचायती राज की शुरुआत हुई। 1992 में 73वें संविधान संशोधन ने पंचायतों को संवैधानिक दर्जा दिया और उनके चुनाव, कार्यकाल, आरक्षण और वित्तीय अधिकारों के लिए मार्गदर्शक प्रावधान निर्धारित किए।
6. सरपंच का चुनाव कैसे होता है?
सरपंच का चुनाव ग्राम पंचायत क्षेत्र के पंजीकृत मतदाताओं द्वारा सीधे मतदान के माध्यम से होता है। उम्मीदवार को निर्धारित नामांकन प्रक्रिया पूरी करनी होती है, जिसमें पात्रता की शर्तें, आयु सीमा और अन्य कानूनी आवश्यकताएं शामिल हैं। मतदान मतपत्रों से होता है और मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद मतगणना कर परिणाम घोषित किया जाता है। उम्मीदवार की पात्रता और नामांकन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी के लिए संबंधित लेख देखें।
7. चुनाव में जनसमर्थन की भूमिका
पंचायत चुनाव में स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवार की सामाजिक छवि, विकास कार्यों का रिकॉर्ड और क्षेत्रीय समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मतदाता अपने निकटतम प्रतिनिधि का चुनाव करते समय स्थानीय आवश्यकताओं और उम्मीदवार की पहुंच को ध्यान में रखते हैं। हालांकि, किसी विशेष जाति, समुदाय या सामाजिक समूह के मतदान व्यवहार के बारे में बिना विश्वसनीय साक्ष्य के सामान्यीकरण नहीं किया जाना चाहिए।
8. पंचायती राज की त्रिस्तरीय व्यवस्था
राजस्थान में पंचायती राज की त्रिस्तरीय व्यवस्था है:
- ग्राम पंचायत (निचला स्तर): गांव स्तर पर निर्वाचित निकाय, जिसका प्रमुख सरपंच होता है।
- पंचायत समिति (मध्य स्तर): ब्लॉक स्तर पर निर्वाचित निकाय, जिसका प्रमुख प्रधान होता है।
- जिला परिषद (शीर्ष स्तर): जिला स्तर पर निर्वाचित निकाय, जिसका प्रमुख जिला प्रमुख होता है।
तीनों स्तरों के सदस्य सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं, जबकि प्रधान और जिला प्रमुख का चुनाव संबंधित निकाय के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाता है।
9. 2026 का चरणवार चुनाव कार्यक्रम
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, चारों चरणों की तिथियां निम्नलिखित हैं। ध्यान दें कि 6 अक्टूबर 2026 को पहले तीन चरणों की तिथियों में संशोधन किया गया था, इसलिए यहां संशोधित तिथियां दी गई हैं।
तालिका 1: जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों का चरणवार मतदान कार्यक्रम
| चरण | मतदान की तारीख | चुनाव का प्रकार | स्थिति (29 अक्टूबर 2026 तक) |
|---|---|---|---|
| प्रथम चरण | 22 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) | जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्य | संपन्न |
| द्वितीय चरण | 28 अक्टूबर 2026 (बुधवार) | जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्य | संपन्न |
| तृतीय चरण | 3 नवंबर 2026 (मंगलवार) | जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्य | आगामी |
| चतुर्थ चरण | 14 नवंबर 2026 (शनिवार) | जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्य | आगामी |
तालिका 2: पंच और सरपंच का चरणवार मतदान कार्यक्रम
| चरण | मतदान की तारीख | चुनाव का प्रकार | स्थिति (29 अक्टूबर 2026 तक) |
|---|---|---|---|
| प्रथम चरण | 24 अक्टूबर 2026 (शनिवार) | पंच एवं सरपंच | संपन्न (परिणाम घोषित) |
| द्वितीय चरण | 30 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार) | पंच एवं सरपंच | आगामी |
| तृतीय चरण | 5 नवंबर 2026 (गुरुवार) | पंच एवं सरपंच | आगामी |
| चतुर्थ चरण | 16 नवंबर 2026 (सोमवार) | पंच एवं सरपंच | आगामी |
तालिका 3: उपसरपंच के चुनाव की तारीखें
| चरण | उपसरपंच चुनाव की तारीख | स्थिति (29 अक्टूबर 2026 तक) |
|---|---|---|
| प्रथम चरण | 25 अक्टूबर 2026 (रविवार) | संपन्न |
| द्वितीय चरण | 31 अक्टूबर 2026 (शनिवार) | आगामी |
| तृतीय चरण | 6 नवंबर 2026 (शुक्रवार) — संभावित | आगामी |
| चतुर्थ चरण | 17 नवंबर 2026 (मंगलवार) — संभावित | आगामी |
नोट: तृतीय और चतुर्थ चरण के उपसरपंच चुनाव की तारीखें संबंधित चरण के पंच-सरपंच मतदान के बाद निर्धारित की जाती हैं। कृपया अंतिम पुष्टि के लिए राज्य निर्वाचन आयोग की नवीनतम अधिसूचना देखें।
तालिका 4: जिला प्रमुख, उप जिला प्रमुख, प्रधान और उपप्रधान के चुनाव
| पद | चुनाव की स्थिति / तारीख | टिप्पणी |
|---|---|---|
| जिला प्रमुख एवं उप जिला प्रमुख (41 जिले) | जिला परिषद सदस्यों की मतगणना (20 नवंबर 2026) के बाद | निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुनाव |
| प्रधान एवं उपप्रधान (457 पंचायत समितियां) | पंचायत समिति सदस्यों की मतगणना (20 नवंबर 2026) के बाद | निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुनाव |
| जिला प्रमुख, उप जिला प्रमुख, प्रधान, उपप्रधान — बारां, श्रीगंगानगर, करौली, कोटा | दिसंबर 2026 (पृथक तिथि घोषित की जाएगी) | इन चार जिलों का कार्यकाल दिसंबर 2026 में पूरा होगा |
10. 29 अक्टूबर 2026 तक की स्थिति
प्रथम चरण: 24 अक्टूबर 2026 को 16 जिलों की 3,314 ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंच के लिए मतदान हुआ। मतदान समाप्ति के तुरंत बाद मतगणना हुई और परिणाम घोषित किए गए। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस चरण में सरपंच और वार्ड पंच निर्वाचित घोषित किए गए। 25 अक्टूबर 2026 को संबंधित ग्राम पंचायतों में उपसरपंच का चुनाव संपन्न हुआ।
द्वितीय चरण: 28 अक्टूबर 2026 को 22 जिलों में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान हुआ। 29 अक्टूबर 2026 को पंच और सरपंच पदों के लिए नामांकन दाखिल किए गए। 30 अक्टूबर 2026 को पंच और सरपंच के लिए मतदान निर्धारित है, जिसके बाद संबंधित ग्राम पंचायतों में मतगणना होगी।
तालिका 4: जिला प्रमुख, उप जिला प्रमुख, प्रधान और उपप्रधान के चुनाव
| पद | चुनाव की स्थिति / तारीख | टिप्पणी |
|---|---|---|
| जिला प्रमुख एवं उप जिला प्रमुख (41 जिले) | जिला परिषद सदस्यों की मतगणना (20 नवंबर 2026) के बाद | निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुनाव |
| प्रधान एवं उपप्रधान (457 पंचायत समितियां) | पंचायत समिति सदस्यों की मतगणना (20 नवंबर 2026) के बाद | निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुनाव |
| जिला प्रमुख, उप जिला प्रमुख, प्रधान, उपप्रधान — बारां, श्रीगंगानगर, करौली, कोटा | दिसंबर 2026 (पृथक तिथि घोषित की जाएगी) | इन चार जिलों का कार्यकाल दिसंबर 2026 में पूरा होगा |
10. 29 अक्टूबर 2026 तक की स्थिति
प्रथम चरण: 24 अक्टूबर 2026 को 16 जिलों की 3,314 ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंच के लिए मतदान हुआ। मतदान समाप्ति के तुरंत बाद मतगणना हुई और परिणाम घोषित किए गए। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस चरण में सरपंच और वार्ड पंच निर्वाचित घोषित किए गए। 25 अक्टूबर 2026 को संबंधित ग्राम पंचायतों में उपसरपंच का चुनाव संपन्न हुआ।
द्वितीय चरण: 28 अक्टूबर 2026 को 22 जिलों में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान हुआ। 29 अक्टूबर 2026 को पंच और सरपंच पदों के लिए नामांकन दाखिल किए गए। 30 अक्टूबर 2026 को पंच और सरपंच के लिए मतदान निर्धारित है, जिसके बाद संबंधित ग्राम पंचायतों में मतगणना होगी।
11. जिला प्रमुख और प्रधान का चुनाव
जिला प्रमुख का चुनाव जिला परिषद के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाता है, जबकि प्रधान का चुनाव पंचायत समिति के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाता है। यह चुनाव अप्रत्यक्ष होता है, जिसमें संबंधित निकाय के सदस्य अपने प्रमुख का चयन करते हैं। जिला प्रमुख और प्रधान का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है।
बारां, श्रीगंगानगर, करौली और कोटा जिलों में जिला प्रमुख, उप जिला प्रमुख, प्रधान और उपप्रधान का पांच वर्षीय कार्यकाल दिसंबर 2026 में पूरा होगा, इसलिए इन पदों के चुनाव अभी नहीं कराए जा रहे हैं। आयोग बाद में इनके लिए अलग तिथि घोषित करेगा।
12. विभिन्न पदों में अंतर
- सरपंच: ग्राम पंचायत का निर्वाचित प्रमुख, सीधे जनता द्वारा चुना जाता है।
- प्रधान: पंचायत समिति का प्रमुख, निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुना जाता है।
- जिला प्रमुख: जिला परिषद का प्रमुख, निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुना जाता है।
- पंच: ग्राम पंचायत का वार्ड सदस्य, सीधे जनता द्वारा चुना जाता है।
- पंचायत समिति सदस्य: ब्लॉक स्तर के निर्वाचित सदस्य, सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं।
- जिला परिषद सदस्य: जिला स्तर के निर्वाचित सदस्य, सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं।
13. राजनीतिक दलों की भूमिका
राजस्थान में पंचायत चुनाव में राजनीतिक दलों की भागीदारी रहती है, लेकिन पंच और सरपंच के चुनाव में दलों के आधिकारिक चुनाव चिह्न का उपयोग नहीं होता। जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव में राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों का समर्थन करते हैं। हालांकि, पंचायत चुनाव का मूल स्वरूप स्थानीय और गैर-दलीय होता है, जिसमें स्थानीय मुद्दे और उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि अधिक महत्वपूर्ण होती है।
14. आरक्षण व्यवस्था
राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था है। 73वें संविधान संशोधन के तहत महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों का आरक्षण अनिवार्य किया गया था, जिसे राजस्थान में 50 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है। सरपंच पद के लिए आरक्षण श्रेणी संबंधित ग्राम पंचायत की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार निर्धारित होती है।
किसी ग्राम पंचायत में सरपंच पद की आरक्षण श्रेणी का अनुमान न लगाएं; संबंधित आधिकारिक अधिसूचना देखें। आरक्षण व्यवस्था की विस्तृत जानकारी के लिए संबंधित लेख देखें।
15. चुनाव परिणाम कैसे देखें?
राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 के परिणाम राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट और संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों के माध्यम से देखे जा सकते हैं।
- पंच और सरपंच: मतदान समाप्ति के तुरंत बाद संबंधित ग्राम पंचायत मुख्यालय पर मतगणना होती है और परिणाम घोषित किए जाते हैं।
- पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य: 20 नवंबर 2026 को जिला मुख्यालय पर मतगणना होगी और परिणाम घोषित किए जाएंगे।
- प्रधान और जिला प्रमुख: संबंधित निकाय के निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुनाव के बाद परिणाम घोषित किया जाएगा।
आधिकारिक परिणाम देखने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट sec.rajasthan.gov.in पर जाएं और चुनाव/परिणाम अनुभाग देखें।
16. महत्वपूर्ण तथ्य
- कुल मतदाता: 4,03,07,308 (पुरुष: 2,08,87,351; महिला: 1,94,19,789; थर्ड जेंडर: 168)
- कुल जिला परिषद: 41
- कुल पंचायत समिति: 457
- कुल ग्राम पंचायत: 14,403
- कुल निर्वाचित जनप्रतिनिधि (अनुमानित): 1,55,138
- मतदान केंद्र: 45,384
- चुनाव कार्य में लगे कार्मिक: लगभग 3,17,688
- पुलिस बल: लगभग 2,72,304
- जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव: ईवीएम से
- सरपंच और वार्ड पंच चुनाव: मतपत्रों से
17. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 की मुख्य तारीखें क्या हैं?
उत्तर: जिला परिषद/पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान 22 अक्टूबर, 28 अक्टूबर, 3 नवंबर और 14 नवंबर 2026 को; पंच/सरपंच के लिए 24 अक्टूबर, 30 अक्टूबर, 5 नवंबर और 16 नवंबर 2026 को; और मतगणना 20 नवंबर 2026 को निर्धारित है।
प्रश्न: सरपंच चुनाव का कार्यक्रम क्या है?
उत्तर: सरपंच और पंच के लिए मतदान चार चरणों में—24 अक्टूबर, 30 अक्टूबर, 5 नवंबर और 16 नवंबर 2026 को हो रहा है। प्रत्येक चरण में मतदान के तुरंत बाद मतगणना होती है।
प्रश्न: पंचायत समिति और जिला परिषद के परिणाम कब आएंगे?
उत्तर: पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों की मतगणना 20 नवंबर 2026 को जिला मुख्यालयों पर होगी। परिणाम उसी दिन घोषित किए जाएंगे।
प्रश्न: प्रधान और जिला प्रमुख का चुनाव कब होगा?
उत्तर: प्रधान और जिला प्रमुख का चुनाव संबंधित निकाय के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाता है। सामान्य कार्यक्रम के अनुसार यह चुनाव जिला परिषद/पंचायत समिति सदस्यों की मतगणना (20 नवंबर 2026) के बाद होगा। बारां, श्रीगंगानगर, करौली और कोटा में यह चुनाव दिसंबर 2026 में होंगे।
प्रश्न: राजस्थान में पंचायती राज की शुरुआत कब हुई?
उत्तर: 2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के नागौर जिले से देश में पंचायती राज की विधिवत शुरुआत हुई।
प्रश्न: 73वां संविधान संशोधन क्या है?
उत्तर: 73वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 ने पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया। यह 24 अप्रैल 1993 से प्रभावी हुआ।
प्रश्न: सरपंच पद की आरक्षण व्यवस्था कैसे निर्धारित होती है?
उत्तर: सरपंच पद का आरक्षण संबंधित ग्राम पंचायत की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार निर्धारित होता है। इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षण शामिल है।
प्रश्न: आधिकारिक परिणाम कैसे देखें?
उत्तर: राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट sec.rajasthan.gov.in पर जाएं और चुनाव परिणाम अनुभाग देखें। संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
19. आधिकारिक स्रोत और उपयोगी लिंक
- राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान पंचायत चुनावों के आधिकारिक कार्यक्रम, अधिसूचनाओं और परिणामों की जानकारी के लिए। sec.rajasthan.gov.in
- राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 का उपलब्ध आधिकारिक कार्यक्रम चरणवार तिथियों और विस्तृत कार्यक्रम के लिए। rajepanchayat.com/public/election/view?id=2 (नोट: यह एक सूचना प्लेटफॉर्म है; आधिकारिक पुष्टि के लिए sec.rajasthan.gov.in देखें)
- राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 की संशोधित समय-सारणी 6 अक्टूबर 2026 को जारी संशोधित तिथियों के लिए। rajepanchayat.com/public/election/view?id=7
- पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार पंचायती राज से संबंधित नीतियों, कार्यक्रमों और प्रकाशनों के लिए। panchayat.gov.in
- भारत का संविधान और 73वां संविधान संशोधन संवैधानिक प्रावधानों और संशोधन अधिनियम के लिए। legislative.gov.in
- भारत निर्वाचन आयोग राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय निर्वाचन प्रक्रियाओं की सामान्य जानकारी के लिए। eci.gov.in
20. निष्कर्ष
राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 ग्रामीण लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह चुनाव स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने, गांवों के विकास को गति देने और जनभागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मतदाताओं को चाहिए कि वे अपने मताधिकार का सही उपयोग करें और स्थानीय मुद्दों तथा उम्मीदवारों की क्षमता के आधार पर अपना निर्णय लें।
चुनाव संबंधी किसी भी जानकारी की अंतिम पुष्टि के लिए राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट और संबंधित निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय से संपर्क करें।

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