सिंधु जल संधि के साये में भारत-पाक संबंध: क्या अब बदलाव तय है?
हाल ही में पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ एक के बाद एक कई कड़े फैसले लिए हैं, जिनका सीधा असर दोनों देशों के बीच जनसंपर्क, कूटनीति और व्यापार पर पड़ा है। वाघा बॉर्डर को तत्काल प्रभाव से बंद किया गया, भारतीय नागरिकों को 30 अप्रैल तक पाकिस्तान छोड़ने का आदेश दिया गया और भारतीय रक्षा अधिकारियों को ‘अवांछित’ घोषित कर दिया गया। इसके अलावा पाकिस्तान ने भारतीय एयरलाइनों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया और भारत के साथ हर प्रकार का व्यापार तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। इन घटनाओं को सिंधु जल संधि की पृष्ठभूमि में देखने की आवश्यकता है। 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता से बनी यह संधि दुनिया की सबसे सफल जल समझौतों में से एक मानी जाती रही है। लेकिन बदलते राजनीतिक समीकरण और सीमापार तनाव के चलते अब इस संधि की स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं। क्या यह सिर्फ एक राजनयिक प्रतिक्रिया है या इसके पीछे कुछ और है? पाकिस्तान के हालिया निर्णय केवल कूटनीतिक कदम नहीं लगते। इनका उद्देश्य भारत पर राजनीतिक दबाव बनाना भी हो सकता है, खासकर ऐसे समय में जब भारत ने भी यह संकेत दिए हैं कि संधि की समीक्षा हो ...